श्री गंगानगर में अनूठा शैक्षिक कल्प वृक्ष उगाने वाले पद्मश्री श्यामसुंदर महेश्वरी जी का देहावसान अपूरणीय क्षति: रूप सिंह राजपुरी मुझे अकस्मात एक शानदार भारी बंद लिफाफा एक परिचित ने घर बैठे बिठाये लाकर दिया । प्रेषक का नाम देखा तो विद्यार्थी शिक्षा सहयोग समिति श्री गंगानगर लिखा था । इस परोपकारी संस्था का नाम सुना हुआ था कभी जा कर देखने की साध मन में आज भी है । बस अखबारों में पढ़ा था इससे ज्यादा कोई जानकारी नहीं थी । संस्था की नींव रखने में महत्ती भूमिका निभाने वाले कर्मयोगी पद्मश्री श्याम सुंदर महेश्वरी जी के बारे में भी सुन रखा था कि वे इस संस्था के लिये प्राणपण और जनून के साथ जुटे हुए हैं । लिफाफा खोलकर देखा तो भीतर से नयनाभिराम छवि धारे चमचमाते रंगीन ग्लेज कागज पर छपी संस्था की स्मारिका "समर्पण 2021" निकली । देखते ही मन बाग बाग हो गया । स्मारिकाएँ उपलब्ध होती रहती हैं लेकिन इतनी श्रम साध्य ,रोचक, विषय विविधता व 31 वर्षों का विगत स्वयं में समेटे एक संग्रहनीय ऐतिहासिक दस्तावेज मेरे हाथों में था ।भीतर के पृष्ठों पर रचनाकारों ने विद्वता पूर्ण प्रेरक आलेखों के माध्यम से मानव कल्याणार्थ योगदान पाया हुआ मिला ।वहीं अब समाज में प्रतिष्ठित पदों पर आसीन पूर्व विधार्थियों के लेखों से लगा उनमें किसी तरह संस्था के उपकारी ऋण से उऋण होने की उत्कंठा हिलोरें ले रही है । उन्होंने संस्था सहयोग को जीवन धारा परिवर्तन का नियामक माना है । वे श्री श्याम सुंदर महेश्वरी जी व अन्य संचालकों को भगवान का दर्जा देते हैं । संस्था से जुड़े विद्वान शिक्षाविदों ,भामाशाहों ,सदस्यों ने भी अपने बहुमूल्य विचार व्यक्त किये हैं वहीं देश, राज्य व समाज के अग्रज राजनीतिज्ञों ,अधिकारियों ,व्यापारियों व समाजसेवियों ने शुभ कामना संदेशों के माध्यम से अपना आशीर्वाद संस्था को भेजा है । श्री गंगानगर में 23 अक्टूबर 1988 से निरन्तर संचालित विद्यार्थी शिक्षा सहयोग समिति ने अनूठा भागीरथी कार्य अपने कन्धों पर ले रखा है । श्याम नगर पुलिया ,पदमपुर मार्ग स्थित यह संस्था उन विद्यार्थियों को हर प्रकार की वह शिक्षण सहगामी सहायता प्रदान कर रही है जो वे स्वयं अफोर्ड नहीं कर सकते । उच्च कक्षाओं तक फीस ,हॉस्टल ख़र्च, किताबें, स्टेशनरी, पोशाक सहित वह सब कुछ जो एक आर्थिक रूप से कमजोर जरूरतमंद लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थी को चाहिए होता है । हिंदी ,अंग्रेजी व संस्कृत भाषा में छपी रचनाओं में रचनाकारों ने कलेजा निकाल कर कागज पर रख छोड़ा है । अनेक सफल लोग भी अपने अतीत में झांकने से डरते हैं वे केवल उजलेपन का ही जिक्र करते हैं । अपने जीवन की पुस्तक के स्याह पन्नों को किसी के आगे नहीं खोलते । उन्हें डर होता है कहीं समाज में छवि धूमल न हो जाये । लेकिन स्मारिका में कभी पैसों के लिये मोहताज रहे लेकिन आज सफल अधिकारियों ने बड़ी ईमानदारी के साथ संस्था में आने व यहां मिले सहयोग का जिक्र किया है । इस तरह की बेबाकी भी निसन्देह उन्हें संस्था के कर्णधारों के व्यक्तित्व को देख कर मिली होगी । स्मारिका में विगत का सम्पूर्ण ब्यौरा है वहीं भविष्य की योजनाओं का खाका भी है । हर पन्ने पर की गई मेहनत स्पष्ट दिखाई दे रही है । इतनी बड़ी कृति में लेखन त्रुटियां होना स्वभाविक होता है लेकिन यहां ढूंढते ही रह जाओगे वाली स्थिति है । विज्ञापन दाताओं नें अपनी नेक कमाई को एक सद्कर्म में आहूत किया है । उन्हें पता है हमारा एक एक पैसा सार्थक होकर पुण्य से नहलाया है । पारदर्शिता भी संस्थाओं के सफल होने की कुंजी होती है । स्मारिका के सम्पादक मंडल में गुणी जन शामिल हैं सबने रचना चयन करके उसे यथास्थान लगाने में अपने अनुभव का प्रयोग किया है । मैं अब हतप्रभ हूं जब सुना कि पदम् श्री श्याम सुंदर महेश्वरी जी अब इस संसार में नहीं हैं उनकी पावन समृति को कोटिशःनमन अर्पित करता हूँ जिन्होंने 32 वर्ष पूर्व ऐसा पौधारोपण किया जो उसी वर्ष से मीठे शैक्षिक फल दे रहा है । ईश्वर आपको अपने चरणों में निवास दें परिवार व संस्था पदाधिकारियों को विछोह सहन करने की शक्ति प्रदान करें उनके बाद उन द्वारा अपने हाथों लगाये इस वृक्ष को सिंचित कर फलदायी बनाये रखें । रूपसिंह राजपुरी साहित्यकार रावतसर, जिला हनुमानगढ़ राजस्थान 335524 फोन न. 9928331870


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