Saturday, September 17, 2022

उमरां च की रखया उम्र के हिसाब में कांग्रेस इस देश में सबसे बजुर्ग बूढ़ी माई है । एक सौ छत्तीस साल की हो गई । इस उम्र में बुढापे के लक्षण व्यूटीपार्लर के पास जाने से भी नहीं छुपते ।उम्र की बात और कांग्रेस के ग्रह आपस में मेल नहीं खाते । पार्टी की नींव अंग्रेज ने रखी है इसलिये कुछ अंश अंग्रेजियत के सदा रहते आये हैं । नेहरू जी के कपड़े पेरिस से धुल कर आते थे । झीलों की नगरी उदयपुर में कांग्रेस का चिंतन शिविर सम्पन्न हुआ उसमें वही बात हो गई, जिसका डर था । उम्र की बात चल निकली जिसे बाद में मेजबान राज्य के कांग्रेसियों ने ही नकार दिया । विरोधियों ने इस आयोजन को चिंता शिविर, किसी ने कहा यह मृतप्राय पार्टी का चिता शिविर है । खैर विरोधी तो बाल की खाल उधेड़ेंगे ही । खूबसूरत शहर में चार सौ के लगभग कांग्रेसी इकठ्ठे हुए महंगे होटलों में लजीज खाना, घूमना- फिरना भी हो गया बड़ों के साथ बैठना भी हुआ और पार्टी में अपने कद का पता भी चल गया । पूरे देश से पार्टी के विश्वसनीय जन बुलाये गये थे ।राजस्थान से केवल दो विधायक ही शामिल हो पाए उनमें एक नोहर विधायक अमित चाचाण सौभाग्यशाली रहे । गांधी परिवार से सोनिया जी, राहुल गांधी व प्रियंका जी भी उत्साह के साथ शामिल रहे । सोनिया जी ने कहा पार्टी ने आपको बहुत दिया है अब लौटाने की बारी है । उन्हीं की नजरे -इनायत का हर कोई चाहवान था । जब मां, बेटा, बेटी में से कोई एक भी सामने होता है तब असली कांग्रेसी खुद को भूल जाता है, बस तू ही तू ही का अलाप करता है । उसकी रीढ़ लचकदार हो जाती है । यह इस पार्टी की परिपाटी है । पंजाब से इसी दौरान बुरी खबर भी मिली वहां के कद्दावर और मूल कांग्रेसी सुनील जाखड़ ने गम्भीर आरोप लगाते हए पार्टी छोड़ दी और आश्चर्यजनक रूप से भाजपा ज्वाइन कर ली राजस्थान से भी दो विधायक भाजूँ भाजूँ कर रहे हैं । शिविर में सोनिया जी के सामने किसी ने भी यह कहने की जुर्रत नहीं की कि पार्टी में जान डालने के उद्देश्य से एक कार्यकाल के लिये आपके परिवार से बाहर के व्यक्ति को पार्टी अध्यक्ष बनाने का प्रयोग किया जाये । सब जानते थे ऐसा कहने वाले की फजीती पक्की थी । सब ने राहुल को अध्यक्ष बनाने पर ही जोर दिया । सब चापलूसी की महिमा जानते हैं । यह बात शिविर में आये उस प्रस्ताव से साबित हो जाती है कि एक परिवार से एक को ही टिकिट मिलेगी पर यह पाबंदी गांधी परिवार पर लागू नहीं होगी । नतमस्तक संस्कृति का उदाहरण कई बार वायरल हो जाता है ,किसी प्रदेश का मुख्यमंत्री गांधी परिवार के सदस्य को ऊंट पर चढ़ाते समय छुट भैया नेताओं, अधिकारियों के लवाजमे के बावजूद खुद कंधे पर पांव रखवाने को जीवन सफल मान चुका है । एक बार इसी परिवार की एक महिला की जूती भीड़ में खुल गयी थी तब भी मुख्यमंत्री लोगों के पांवों की ठोकरों के बीच तलाश कर खुद पहनाकर फख्र महसूस कर चुका है । हो सकता है किसी चमचे ने जूती ढूंढ ली हो श्रेय मुख्यमंत्री जी को दिलवाने के लिये उन्हें पकड़ा दी हो । दीन दुखी की सेवा करने का भला काम गांधी परिवार ने भी किया होगा पर उन्हें उनका प्रचार करना नहीं आया जैसा मोदीजी ने मैला उठाने वालों के चरण पखार कर हासिल कर लिया था । चिंतन शिविर से उस नेता को बाहर रखा गया जिसके लिये लोग पागलों की तरह चिल्लाते थे हमारा युवा ह्रदय सम्राट जिन्दावाद । जिसे मिली उपमुख्यमंत्री की कुर्सी से सब्र न था और भयंकर करोना काल में सरकार को होटल दर होटल भटकने को विवश कर दिया था । उसे सोचना चाहिए था राजस्थान में सिर्फ ननिहाल ही है । मेरा प्रदेश तो यूपी है यहां की बड़ी कुर्सी कैसे दे देंगे । लेकिन नजरें उसी कुर्सी पर हैं । यहां वाले कह रहे हैं "आई छाह लेण,घर गी धिराणी बननी चावै ।" उस युवाह्र्दय सम्राट की अनुपस्थिति में एक यह प्रस्ताव भी आया कि पार्टी संगठन में पचास प्रतिशत पद पचास साल से कम उम्र वालों से भरे जायें । उम्र के सवाल पर पहले भी पार्टी की खीर जूतों में बंट चुकी है ।इतिहास के आईने की गर्द साफ करके देखें तो इंदिरा जी ने भी कभी अपनी जवानी के दिनों में पार्टी पर काबिज उम्रदराज बजुर्गों का पत्ता साफ करने का प्रयास करते हुए कह दिया था कि साठ साल से बड़े नेता को कोई पद नहीं मिलेगा कामराज, निजलिंगप्पा व मोरारजी देसाई आदि उनके निशाने पर थे । यह प्रयास उल्टा पड़ गया । कांग्रेस और चुनाव चिन्ह दो बैलों की जोड़ी बूढ़ों के हाथ रही । इंदिरा जी को नई पार्टी,नया नाम और निशान गाय बछड़ा बनाना पड़ा । सन्देश था बैलों की जोड़ी दोबारा बनेगी । थोड़े दिनों बाद इंडियन नेशनल कांग्रेस और बैल घास चरने चले गए और कांग्रेस आई के नाम से हाथ चुनाव चिन्ह सामने आया । कांग्रेस का हाथ सबके साथ को ध्यान में रखते हुए दोबारा उम्र पर चिंतन नहीं किया । पता नहीं क्यों उदयपुर शिविर में फिर से इस गड़े मुर्दे को उखाड़ लिया । इससे कितने ही भूतपूर्व युवाओं में हलचल मच गयी । सोनिया जी के सामने कोई बोला नहीं बाद में मंत्री जी से कहलवा दिया कि उम्र की बात करना अपनी कमजोरी दिखाना है । प्रधानमंत्री की उम्र देख लेनी चाहिये । बात में संतुलन बनाते हुए यह भी कहा कि युवाओं को मुगालते में नहीं रहना चाहिये कि वे फिट हैं तो टिकिट उन्हें ही मिलेगी । एक परिवार से एक टिकिट पर भी उन्होंने कहा है कि जिसमें दम होगा वह धरती फाड़ कर भी बाहर आ जायेगा । यानी ये दोनों सुझाव यहां तो नकार दिए गए हैं । विश्लेषक मानते हैं इन प्रस्तावों को नकारने को मुख्यमंत्री की सहमति मानना चाहिये उनके खास मंत्री ने यह सब कहा है और मुख्यमंत्री को 'युवा' शब्द असहज भी करता होगा । भला मार्ग दर्शक मंडल में कौन जाना चाहेगा । मज़ाक में भी किसी कांग्रेसी से पूछा जाये कि 'उमरां च की रखया' तो वह ट्यून मिलाते हुए कहेगा 'दिल होना चाहीदा जवान ।'

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