Saturday, September 17, 2022

अ अफीम ग गाड़ी में रख पुरानी कहावत है जो गुड़ देने से मर सकता है उसे जहर क्यों दिया जाये ,अब कहावत बदल कर यह हो गई कि जिसे अफीम केस में फंसाया जाये उसके सामने आने की क्या जरूरत है ? अफीम शाही नशा है । शराब जैसा घर ऊजाड़ू व्यसन नहीं । अफीम की खेती सरकार खुद करवाती है और खुद खरीदती है फिर भी आम आदमी को उपलब्ध नहीं । अफीम खा कर शराबियों की तरह झगड़ा फसाद नहीं होता बल्कि आम दिनों की बजाय अमली ज्यादा काम करता है । अफीम से पोस्त सस्ता है और मजदूरों से अधिक काम लेने के लिये उनकी चाय में चोरी से पोस्त या अफीम मिला कर दी जाती थी यही बेईमानी उड़ता पंजाब का कारण हो गई । हमारे यहां भी हाड़ी के दिनों में आम तौर पर हर किसान के घर में अफीम मिल जाया करती थी । तर्क होता था थकावट नहीं होती । यह भी कहा जाता है अफीम खून को पतला करती है और ब्लड प्रेशर को सही रखती है । कई दवाइयों में अफीम की मात्रा रहती है । मांग हो रही है कि अफीम सर्व सुलभ कर दी जानी चाहिये । अफीम लोक जीवन में घुली मिली है । कितने ही लोक गीत अफीम पर बने हैं ।अमलियों पर बने चुटकले हास्य विनोद पैदा करते हैं । मारवाड़ में मनुहार का जरिया ही अफीम है । घर आये मेहमान या मिजाज पुर्सी को आये लोगों को पानी में अफीम घोल कर 'घूंटीया' पिलाना आम बात है । सर्दी में छोटे बच्चों को बाजरी के दाने जितनी देते रहने का रिवाज रहा है । लकवा के अटैक के समय ग्रामीण क्षेत्र में आज भी अफीम पर निर्भरता की बात चलती है । इन दिनों जिले में फिर से यही अफीम चर्चा में है । हमारे सार्वजनिक पड़ोसी गिरधारी लाल के घर से सुबह से ही तेज आवाजें आ रही थीं । वे निखट्टू पुत्र से गुस्से से बतिया रहे थे लगता था लड़ रहे हैं । कह रहे थे 'कोई काम धाम पकड़ ले ,मेरा घर सराय नहीं है जो रैनबसेरा करने आ जाते हो ।' जवान लड़का सामने से सटीक प्रश्न कर रहा था 'क्या काम करूँ?' तो गिरधारी लाल कह रहे थे 'किसी की गाड़ी में अफीम ही रख दे । कुछ दिन जेल जायेगा तो भी घर में तो शांति रहेगी । रोटियां तो सरकारी तोड़ेगा ।' लड़का पूछ रहा था 'डेढ़ किलो अफीम जितने पैसे होते तो मैं आपके मुंह लगता क्या ? कोई दुकान न कर लेता । आपकी जली कटी तो न सुनता ।' गिरधारीलाल बेटे से दबना नहीं चाहते थे बोले 'अनाज के दुश्मन तुझे अकल कब आएगी पहले किसी से चार पांच लाख उधार ले फिर उसे किसी से मिलकर लपेटे में ले । दुकानों जमीनों पर कब्जे करने हों तो आजकल इसी ट्रिक का ट्रेंड है ।' पर लड़का टस से मस न हो रहा था ।पुराने जमाने के राजा महाराजा शत्रु को ठिकाने लगाने के लिये विषकन्या का सहारा लेते थे । कौटिल्य के नीतिपरक ग्रन्थ 'अर्थशास्त्र' में विषकन्या तैयार करने, उससे काम लेने,शत्रु को सुलटाने व उससे बचने आदि के उपायों पर पूरा अध्याय लिखा पड़ा है । दूसरे से पीछा छुड़ाने के लिये तीसरे के कंधे पर रख कर चलाने वाले हर युग में हुए हैं । हनुमानगढ़ में किसी को फंसाने के लिये अफीम का सहारा इस काम में लेने का दूसरी बार उदाहरण सामने आया है । पुलिस के सभी अधिकारी भ्रष्ट नहीं होते । पिछले अफीम कांड में भी सही जांच में दूध का दूध पानी का पानी छान दिया था । जिस व्यक्ति की गाड़ी में कोर्ट परिसर में ही अफीम रखवाई थी वह निर्दोष साबित हुआ । ऐसा ही ताजा मामले में हुआ है जबकि मामले के तार हरियाणा के साथ भी जुड़े थे । वहां की पुलिस ने भी अत्यधिक जल्दवाजी और अतिरिक्त तेजी दिखाई थी। मामला मुख्यमंत्री हरियाणा तक पहुंचा और पीड़ित को फौरी राहत मिली । बहुत सारे निर्दोष जेलों में विचाराधीन पड़े रहते हैं वर्षों बाद वे निर्दोष साबित भी हो जायें तो क्या फायदा ,उम्र ढल जाती है । सबके मामले में समाज या संगठन बराबर नहीं खड़े होते और न ही डॉक्टर रामप्रताप जैसा धुरंधर सबकी पैरवी करता है । इन दोनों वारदातों में रसूखदार लोगों का नाम जुड़ा पाया गया । वैसे तो जांच बंद नहीं हुई, केस का पटापेक्ष नहीं हुआ, जांच लम्बी चलेगी । पीड़ित को जरूर छोड़ा गया है । अब वह निश्चित हो कर नाटक के आगामी एपिसोड का दर्शक बनेगा । पकड़ा आरोपी गवाह बनेगा और फोन की काल डिटेल आदि निकलवाई जाएगी । कहा गया है निर्दोष पर आंच न आएगी दोषी चाहे कोई भी हो छोड़ा नहीं जाएगा । हो सकता है केस में रोचक नाटकीय मोड़ आयें । कहां से शुरू हुआ मामला कहां जाकर फनिश हो। कर के डैश बोर्ड और स्टेपनी के भेद में वकील लोग कितनी युक्तियां इस्तेमाल करेंगे । कौन बरी होगा कौन नपेगा । काली अफीम कितने सफेद कपड़ों की तरफ उंगली उठाने का मौका देगी । किन किन को पछतावा होगा किसके घर घी के दीये जलेंगे, किसकी राजनीति की रोटियां सिकेंगीं, किसके कितने वोट पक्के हुए । पार्टी में अपने पराये का पता चलेगा । शहर की नाक के सवाल पर कितने अपने रूसाये जाएंगे यह भविष्य के गर्भ में है, लेकिन अफीम बदनाम हो गई । जिसे कालेज के दिनों में बटुए में मोमी कागज में प्रेमिका की तस्वीर सी सम्भाल कर रखते थे दोस्तों से कहते थे , सफेद आंख तो भेड़ की होती है । मर्द की आंख तो लाल ही अच्छी लगती है, छक ले मावा । वही अफीम हथकंडों में इस्तेमाल हो रही है । नकली बिकने लगी है और सोने के भाव हो रही है । कुछ भी हो 'नाग दी बच्ची' को आपसी दुश्मनी निकालने का ओछा हथियार नहीं बनाया जाना चाहिये । किसी से रंजिश निकालनी है तो यह नई बर्णमाला न लिखी जाये, यह मर्दों वाली बात नहीं है । उसके लिये कोई और रास्ता चुना जाना चाहिये।

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