श्मशान भूमि जहां बार बार जाने का मन करता है ।
रावतसर: कल्याण भूमि,श्मशान भूमि,कब्रिस्तान ,शव दाह गृह,मसान या श्मशान घाट आदि ऐसे नाम हैं जो जीवन यात्रा समाप्ति पश्चात हर किसी का अन्तिम पड़ाव हैं ।यही सनातन सत्य है ।अर्थी लेकर हम नही जाते ,अर्थी हमें लेकर जाती है कि आ जाओ मेरे बहाने आप सब भी अपना अंतिम ठिकाना देख लो ।एक दिन यहीं आना है । बताते हैं जन्म समय जितना वजन होता है उतना ही उसकी राख का वजन होता है ।लेकिन ये स्थान ऐसे हैं जिनके पास से निकलने में डर लगता है ।भूत प्रेत का निवास इन्हीं जगहों को मानकर इधर जाने में दिन में भी पसीना छूटता रहा है। रात को पानी की बारी पर दूर रास्ते जाना मंजूर होता था मसानों के पास से नहीं ।लेकिन अब सोच बदली है ।समझ आयी है ।बच्चे और स्त्रियाँ भी अर्थी के साथ भीतर तक जाने लगी हैं।
रावतसर में 5,6 कल्याण भूमियां हैं ।जाति वाइज भी हैं ।लेकिन कुछ सर्व समाज के लिये भी हैं ।ऐसी ही कल्याण भूमि नाथजी का डेरा के पास है जिसे कर्मठ व्यक्तियों ने दर्शनीय स्थल बना दिया है ।भीतर साफ सड़कें,पेयजल ,हजारों आयर्वेदिक महत्व के पेड़,कमरे शेल्टर,और योगा आदि के लिये स्थान बने हैं ।वहां अनेक लोग प्रातःकाल घूमने जाते हैं ।कसरत करते हैं ।व्योवृद्ध धावक 80 वर्षीय बनवारी लाल जी दायमा जी के नेतृत्व में योगा क्लासें यहीं चलती हैं बिल्कुल दाहस्थल के पास ।यहीं शव दाह वाहन खड़ा रहता है ।घर से शव लाने की निशुल्क व्यवस्था है ।बैकुंठी निकालने हेतु स्टील की अर्थी भी है ।काफी सारी कृषि भूमि भी है जिसकी पानी की बारी और सौर ऊर्जा चालित नलकूप भी है ।हर समय यहां चहल पहल रहती है ।आजकल मैं भी आने लगा हूँ यहां ।

