हर इच्छा मेरी सपना बनके, रही अधूरी बाला जी ।इच्छा पूर्ण नाम तिहारो कर दो पूरी बाला जी ।भक्तों के तुम रक्षक बनकर सदा सहाई होते हो ।सच्चे की तुम बांह पकड़ते पाप की नाव डुबोते हो।संकट मोचक बन कर आओ क्या मजबूरी बाला जी------हर इच्छा मेरीतुम तो सब के मन की जानों तुम से बात छुपाएं क्या ।तेरे दर को छोड़ पवनसुत और के दर पे जाएं क्या ।अपनी शरण में ले लो हमको अब क्यों दूरी बाला जी ----हर इच्छा मेरीमन का पंछी भटकन में है उसे सहारा मिल जाये ।उजड़ा चमन उम्मीदों का है, अब यह बगिया खिल जाये।आस अधूरी, प्यास अधूरी, मिले सबूरी बाला जी____हर इच्छा मेरीतेरे होते एक बेचारा, कितने दुखड़े सहता है।रावतसर में राजपुरी तेरा भगत निराला रहता है ।तन मन उसका फीका पड़ गया, करो सिंधुरी बाला जी ।।।।।।।।।16-4-2022


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