Saturday, September 17, 2022

राजस्थानी भाषा को समर्पित एक सरदार :रूपसिंह राजपुरीरूपसिंह राजपुरी इस अंचल में ही नहीं देशभर में राजस्थानी भाषा के एकमात्र सिख कवि हैं जो विदेश में भी कवि सम्मेलनों के दौरान राजस्थानी का परचम फैलाते हैं ।अब तक सिंगापुर,मलेशिया हांगकांग,थाईलैंड दुबई,शारजाह व आबूधाबी सहित अरब अमीरात के सभी राज्यों सहित ग्यारह देशों की यात्रा कर चुके है ।वे बताते हैं विदेशों में रह रहे राजस्थानी अपनी मातृभाषा के लिये तरसते हैं जब कोई कवि उनकी भाषा में काव्यपाठ करता है तो वे दूर दूर से उसे सुनने पहुंचते हैं ।चालीस वर्ष की सरकारी सेवा से सेवानिवृत होकर रावतसर में रहकर साहित्य साधना कर रहे हैं । अखबारों में व्यंग्य लेखों के कॉलम सहित देश भर की साहित्य पत्रिकाओं में छप रहे हैं ।कविता हास्य में व कहानी मार्मिक अंदाज में लिखकर बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दे रहे हैं ।अब तक हिंदी ,राजस्थानी व पंजाबी भाषा में विभिन्न विधाओं की बीस पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं लेकिन राजस्थानी हास्य व्यंग्य कवि के रूप में विशेष पहचान बनी है । टीवी के विभिन्न चैनलों व आकाशवाणी से भी काव्यपाठ करते हैं ।कुछ विडिओज में ख्याली सहारण के साथ अभिनय भी सराहनीय रहा है ।स्काउटिंग गाइडिंग आंदोलन के साथ गहरे तक जुड़े हैं अब भी स्काउट शिविरों में वर्दी पहनकर सेवाएं देते हैं ।ख़ुद ने इस विषय में उच्चतम योग्यता हिमालय बुड वैज हासिल किया है ।रोटरी क्लब ,भारत विकास परिषद सहित अनेक समाजसेवी संस्थाओं से जुड़ाव है ।रावतसर में स्थित वर्द्धाश्रम के संचालक मंडल में रहते हुए समाज के तिरस्कृत व्यक्तियों की सेवा करते हैं ।सेवा निवृत्ति के बाद भी विभिन्न सरकारी विधालयों की प्रबन्ध समिति में विधायक कोटे से सदस्य रहते हुए अपने अनुभवों का फायदा शिक्षा क्षेत्र में दे रहे हैं ।जिला शांति समिति व पुलिस की सी एल जी का सदस्य होने के कारण कानून व्यवस्था के सम्बन्ध में दिए सुझावों को जिला प्रशासन भी ध्यान से सुनता है । साहित्यिक योग्यता के कारण जिला प्रशासन द्वारा प्रकाशित किये जा रहे जिला गजेटियर के सम्पादक मंडल में रूपसिंह राजपुरी को स्थान दिया है और उनकी अनेक रचनाएं उसमें सम्मलित की गई हैं । रावतसर में शहीद स्मारक समिति के अध्यक्ष हैं और शहीद भगत सिंह की विशाल आदमकद मूर्ति नगर के ह्रदय स्थल पर लगवाने में इनकी विशेष भूमिका रही ।हर वर्ष तेईस मार्च को वहां विशाल मेला लगता है और तिरंगा यात्रा निकलती है । 15 अगस्त 1954 को संगरिया तहसील के गांव मोरजंड सिक्खान में जन्में रुपसिंह राजपुरी का बाल्यकाल घोर अभावों में बीता ।अपनी मेहनत के बलबूते समाज में सम्मानजनक स्थान बनाया और काव्य पाठ हेतु राजघरानों से आमंत्रण भी मिले ।

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home