Saturday, September 17, 2022

एक दिन का शिक्षक सम्मानशिक्षक वो चिराग है जो खुद जल कर दूसरों को रोशनी देता है । उसके सम्मान के लिये समाज ने सिर्फ एक दिन पांच सितंबर निश्चित कर रखा है । उस दिन सरकार व विभिन्न संगठन उनमें से कुछ को प्रशंसा पत्र देते हैं । शाल कंधे पर रखकर फोटो खिंचाते हैं । पुराने चेले फेसबुक पर गुरूजी की फोटो लगाकर शाब्दिक सम्मान बिखेरते हुए सार्वजनिक करते हैं । अब तो नियति यह हो गयी है कि जिस दिन उसका अपमान न किया जाये उस दिन को वह सम्मान दिवस समझता है । तहसील से आया अदना अधिकारी भी उसे उसकी कुर्सी से खड़ा करके खुद बैठते समय अपने गुरुओं को याद नहीं रखता जिनकी बदौलत वह आज इस पद पर बैठा है । पहले जगत गुरु कहकर समाज शिक्षक की पूजा करता था । विभाग के अधिकारी ही नहीं मंत्री भी स्कूल में आने के बाद संस्था प्रधान की कुर्सी पर नहीं बैठते थे बल्कि उनके चरण स्पर्श करते थे। कुछ संस्था प्रधानों का भी मानखा मरा होता है वे डी ओ दफ्तर से आने वाले बाबू या हारे विधायक के लिये भी खड़े हो जाते हैं । कुर्सी छोड़ते हैं । एक जगह तहसीलदार व प्रिंसिपल के बीच कुर्सी छोड़ने के लिये द्वंद्व युद्ध हो गया था ।किसी प्रोटोकॉल में नहीं लिखा कि प्रिंसिपल आने वाले के लिये कुर्सी छोड़ेगा जैसे हरी स्याही केवल गजटेड अफसर ही इस्तेमाल कर सकता है की किवदन्ती चल रही है । कोई फालतू का काम जैसे कुत्ते बिल्ली की गिनती या सुबह खुले में शौच जाने वालों को रोकने की ड्यूटी लगानी हो तो तहसील का सहायक कर्मचारी भी शोर मचाकर कहने लगता है मास्टर है ना । सरकार ने भी उसके मूल काम पढ़ाना को दरकिनार कर रखा है और दुनिया भर के ऊल जलूल काम ओढ़ा दिये उस पर रिजल्ट भी उत्कृष्ट चाहिये । निर्धारित मानदंड से कम रहने पर सोलह सत्रह सी सी की तलवार सिर पर लटकती है ।पोषाहार की व्यवस्था अध्यापकों के गले डालने से सारा गुड़ गोबर हो गया । स्टाफ का सारा दिन इसी काम में निकल जाता है ।वे लसन छीलते रह जाते हैं मंत्री मलाई चाटते हैं । इन दिनों राज्य में सम्बंधित मंत्री पर जांच शुरू हो गयी है कि करोना काल में विद्यार्थियों के घर पहुचाने वाले राशन में कुंडी लगाई गयी । अपनी ही फेक्ट्री में पैकेजिंग करते समय कम व घटिया स्तर का सामान भेजा गया । अगर यह सत्य साबित हुआ तो डूब मरने वाली बात होगी ।गरीब घरों के बच्चे ही पोषाहार के लालच में सरकारी स्कूलों में आते हैं उन्हीं के राशन में घपला होना शर्मनाक बात है । वैसे सरकार की इतनी उदारता भी सवाल खड़े करती है कि जब स्कूल लग नहीं रहे । कोई घरों से बाहर निकल नहीं रहा तो घर पर राशन पहुचाने की जल्दी क्या थी । ग्रीष्मावकाश में तो देते नहीं । सब तामझाम फ्राड की तरफ उंगली उठाता है । शिक्षक का सम्मान सरकार की नजरों में कैसा है राज्य के पिछले शिक्षा मंत्री ने अपने घर पहुंचे शिक्षक संघ पदाधिकारियों के साथ जो सलूक किया था उससे सिद्ध हो गया । उस व्यवहार को कोई भी शिक्षक ताउम्र नहीं भूलेगा और वह मंत्री भविष्य में जहां से भी चुनावों में खड़ा होगा वहां उसे एहसास कराने में अपने स्तर पर कोई कोर कसर न छोड़ेगा । उस दिन वहां दो सौ लोग घूम रहे थे वे बुरे नहीं लगे क्योंकि वे तो कार्यकर्ता थे । बस पांच राष्ट्र निर्माता अध्यापक ही नहीं सुहाये । उन्हें कमरे में धकेल कर धमकाते और खुद ही वीडियो बनवाते समय सत्ता का गुरूर चरम सीमा पर था । वहीं वो जुमला दोहराया था मेरे घर को नाथी का बाड़ा समझ रखा है क्या? इन अपमानजनक हालातों के बीच कोई खबर रेगिस्तान में भटकते मुसाफिर को शीतल जल से भरी मटकी की तरह मिल जाती है । बांसबाड़ा के विज्ञान अध्यापक का तबादला जब बामणवास दौसा में हो जाता है तो चालीस छात्र टी सी कटवा कर गुरू जी के साथ ही नये स्कूल में आकर प्रवेश ले लेते हैं । बच्चे उनके पढ़ाने की विधियों के इतने कायल हैं कि उनसे दूर नहीं रहना चाहते । चुरू जिले के आबड़सर गांव के सरकारी सीनियर स्कूल में बोलांवाली तहसील सँगरिया का निवासी युवा विजय सिंह ज्याणी पी टी आई है । वह कितना अच्छा काम कर रहा होगा तभी तो उसे एक साल की सरकारी कोचिंग हेतु बेंगलुरु भेजा जा रहा है । उसे एक साल के लिये दी जा रही विदाई के समय का वीडियो आंखों में आंसू ला देता है वहीं हर शिक्षक की छाती गर्व से ऊंची उठ जाती है कि कोई करे ना करे कर्तव्यनिष्ठ अध्यापक का सम्मान शिष्य तो करते हैं ।

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