बेटीबेटी भेजी राम ने, बेटी है वरदान ।बेटी पगड़ी बाप री,मूछां रो अभिमान।बेटी खेलै आंगणै,मुलकै कुल परिवार।बेटी बूंटो खुसी रो,बेटी तीज तियोंहार ।बेटी कम ना पूत सयूँ,रोशन करती नाम।बेटी जो ना कर सके ,ऐड़ो कुनसो काम ।बेटी सुख रा धाम है ,बरकत रो भंडार।मत मारो रै कोख मैं, रुसै लो करतार ।। -----रूप सिंह राजपुरी


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