रुपइया गिरा रे दुनिया के बाजार में साधु संत कितना ही कहते रहें कि धन दौलत यहीं रह जायेगी । जब अंत समय आयेगा एक पैसा साथ न ले जा पायेगा । कफ़न के जेब भी नहीं होती कब्र में आळा- अलमारी नहीं रहती । न हाथी है न घोड़ा है वहां पैदल ही जायेगा । बहुत उदाहरण हैं कि कारूं का खजाना भी यहीं रह गया। खाली हाथ आया खाली हाथ जायेगा । लेकिन पैसा सदा सर्वदा से अर्थ व्यवस्था की धुरी और रीढ़ रहा है । तभी तो स्टिंग ऑपरेशन से बेखबर एक मंत्री रिश्वत लेते हुए दुनिया को सनातन सत्य से अवगत करवा रहा था कि पैसा भगवान तो नहीं भगवान की कसम उससे कम भी नहीं ।रीढ़ से याद आया झुकने की भी सीमा होती है टूटने की नौबत आ जाये वह झुकना या गिरना किस काम का । रुपया आजकल गिरता ही जा रहा है जैसे उसके रीढ़ है ही नहीं । इतना गिर गया कि अस्सी रुपये से ज्यादा देकर एक डॉलर आने लगा । पैसे धेले के मिजाज को अर्थ शास्त्री समझते हैं । अपना जीव तो बस गिरने पर अफसोस कर सकता है । अर्थशास्त्री बताते हैं 1917 में एक रुपया तेरह डॉलर के बराबर होता था ।यानि डॉलर रुपये के आगे पानी भरता था लेकिन रुपया था इंग्लैंड के पाउंड के नीचे । सन सैंतालीस में भी रुपया और डॉलर बराबर थे एक रुपया एक डॉलर का । तब हमारे देश पर विदेशी कर्ज नहीं था ।अब हालात सम्भाले नहीं सम्भलते, रुपया लुढकता ही जा रहा है । स्थिति कैसी भी हो हम लोग मज़ाक से नहीं चूकते । एक एड की पैरोडी बनी है जिसमें एक जना कह रहा है मैं मजबूत डॉलर छाप अंडरवीयर पहनता हूं अगर रुपया छाप पहना होता तो वह कब का गिर गया होता ।इतिहास बताता है कि हुमांयु को डूबते हुए बचाने वाले भिश्ती के हाथ एक दिन की चौधर आई । हुमायूं ने उसके पूर्व में किये एहसान के कारण एक दिन के लिये राजा बनाया तब उसने चमड़े की मश्क से बनी दमड़ियाँ चलाई । तभी से कहावत चली है चमड़े की चलाना । जिस देश में चमड़े की करंसी चलती रही वहां नोटबंदी हुई । कालाधन गोराधन का भेद नहीं निकल पाया। वे बैंक जो दो रुपये की बॉलपेन रस्सी से बांधकर रखती हैं अरबों रुपये बिना जमानत के विजय माल्या आदि को दे दिया जो लेकर रफूचक्कर हो गए । सब जानते हैं हमारे यहां आने की भेड़ की रस्सी चवन्नी की हो जाती है ।भगौड़ों को वापिस देश में लाने और उनसे रकम वसूलने में हो सकता है मूल रकम से ज्यादा खर्च हो जाये या सरकार माफ कर दे । कोर्ट ने तो माल्या को चार हजार जुर्माना और कुछ माह की सजा का एलान कर दिया है । लोग कह रहे हैं इतना पैसा हजम कर लेने के बाद हम भी इससे तिगुनी चौगनी सजा भुगतने को तैयार हैं । सोशल मीडिया पर लोग भड़ास निकाल रहे हैं कि भगौड़ा कोर्ट द्वारा लगाया जुर्माना भरने के लिये दोबारा बैंक से लोन न ले ले । नोटबन्दी के बाद भी नकली नोट वैसे ही चल रहे हैं । तंगी पहले से ज्यादा हो रही है । महंगाई सुरसा बन गयी मुंह फैलता ही जा रहा है । जिस देश में सात सत्तर के दशक तक ट्रेक्टर पेट्रोल से चला करते थे अब स्कूटरी में डलवाना मुहाल है । खाने पीने के सामान पर बेहिसाब सरकारी टेक्स लगाने से श्रीलंका का पाडीया पून में आ गया है, हमारे यहां भी इतिहास में पहली बार दूध दही दलीये पर जी एस टी सुनने को मिल रही है । बैंक में खुद के पैसे निकलवाने पर भी टेक्स देना पड़े तो भविष्य की योजनाएं समझ में आने लगती हैं । सरकार कह रही है कि रूस यूक्रेन युद्ध,कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक हालात रुपये के गिरने के मुख्य कारण हैं । जनता कह रही है महंगाई सहन कर लेंगे बस मंत्रियों के वेतन भत्ते और कई कई पेंशने वर्दाश्त से बाहर हैं जो जनता का तेल निकालने वाली योजनाएं बनाते और लागू करवाते हैं । कम वेतन में उनका गुजारा नहीं होता तो तामझाम छोड़ दें बिना वेतन विधायक बनने को भी हजारों बेरोजगार युवा बैठे हैं । बेरोजगारी की दर भी तो रुपये के गिरने के कारण बढ़ी है ।


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