Saturday, September 17, 2022

कितने भाई बहिन हो भारत देश महान सदा सर्वदा से हर मामले में विश्व गुरु रहा है । बस एक ही बात वर्षों से साल रही थी कि जनसंख्या के मामले में हम चीन से पीछे रह रहे हैं । हमारा नम्बर इस मामले में चीन के बाद आता है । इस कारण एक दो बच्चों वाले यूरोप के लोग हमारा लोहा मानते रहे हैं कि इन दो देशों में वास्तव में मर्द बसते हैं जो इतने बच्चे पैदा कर लेते हैं और पाल भी लेते हैं। जल्द ही विश्व में कुल जनसंख्या आठ अरब होने जा रही है। 2011 में सात अरब थे उनमें से तीन अरब से ज्यादा हम हिंदी चीनी भाई भाई ही हैं ,बाकी दो सौ से ज्यादा देश हमारे पासंग में भी नहीं वे सारे मिलकर पांच अरब बनते हैं । हम अकेले हर साल एक नया आस्ट्रेलिया पैदा कर देते हैं । कहने का मतलब है दुनिया में आबादी के हिसाब से हम दोनों मित्रां दा ना चलदा है । हमारी आपस में चाहे न बने पर बच्चे पैदा करने में हम एक जैसे हैं । कभी हमारे यहां भी जन संख्या कम रही थी । युद्धों में काम आ जाने के कारण पुरुषों की पैदावार बढाने के लिये बहुविवाह की छूट और दर्जन से अधिक बच्चे पैदा करने वाले को राज की जमीन आदि देने का जिक्र इतिहास में मिलता है । कभी स्त्रियों की कमी भी देखने को मिली तब किसी तरह पैसे देकर एक लुगाई का जुगाड़ हो पाता । एक भाई की शादी हो जाती तो बाकी के पांच सात भाई भी शादी शुदा जैसी फीलिंग पाते थे । तब औरत की दो ही केटेगिरी होती मोल की या पुन्न की । कई देशों में फसल और अन्य उत्पादन सोर्स बहुत हैं, लेकिन उनका उपभोग करने वाले मर्द कम हैं औरतें ज्यादा । तब वहां नौबत यहां तक पहुंची कि मर्द आयात किये जायें यहां उन्हें कई कई शादियां और अधिकाधिक बच्चे पैदा करने की छूट दी जाये । सरकारी भत्ते जमीन और अन्य सुविधाएं दी जायें । तब घने देशों के लन्डूर उधर मुंह उठाकर चल दिये थे । अपने यहां जनसंख्या के सम्बन्ध में अब जाकर सकून मिला, कलेजे में ठंड पड़ी जब पता चला कि अगले साल हम चीन से आगे निकल जायेंगे । पूरी दुनिया में हमारा डंडा घूमेगा बाकी का घाघरा घूमता है । हम जनसंख्या के मामले में विश्व के सबसे पहले नम्बर का खिताब हासिल करने जा रहे हैं यह बात अलग है ओलंपिक आदि खेलों में एक मात्र स्वर्ण पदक के लिये हमारी आंखें तरस जाती हैं । चीन ने इस तरफ विशेष ध्यान दिया है शादी करने की कानूनी उम्र बढा दी वहीं एक से ज्यादा बच्चे हों तो सरकारी नौकरी और अन्य सरकारी सुविधाओं के दरवाजे बंद कर दिये । हम अभी भी इस लालच में लगे हुए हैं कि दो रुपये किलो वाला गेंहूँ घर में ज्यादा आयेगा । कुछ सरकारी योजनाएं भी समझ से परे हैं जैसे नसबंदी करवाने पर कम पैसे मिलते हैं जापा करवाने पर ज्यादा, विशुद्ध घाटा उठाने की प्रवृति हमारी कभी रही नहीं जितने ज्यादा होंगे उतने दिहाड़ी कमाकर लायेंगे । जिनके एक है वही बिगड़ गया तो कहां जायेंगे । ज्यादा होंगे कोई न कोई तो माँ बाप का सहारा बनेगा । सो इसे एक काम समझकर लगे हुए हैं ।लेकिन तसल्ली तो है कि मानसों को तरसते देश किताबों में हमारे बारे में पाठ्यक्रम छापेंगे कि भारत सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है । यहां आकर शोध करेंगे कि क्या कारण हैं इस मिट्टी के लोग धड़ाधड़ बच्चे पैदा कर रहे हैं । उन्हें जरूर उन शहरों कस्बों में सर्वे के लिये ले जाया जायेगा जहां आधी रात को रेल आती है । पिछले हफ्ते विश्व जनसंख्या दिवस मनाया गया । नयी बहस छिड़ी। बीच में धर्म को घसीटा गया । टीवी की धुआंधार मुठभेड़ों में धर्म गुरु और उलेमा लोग अपने अपने तर्क देते रहे । यह सुनने को मिला बच्चे ज्यादा या कम होने में आदमी का कोई हाथ नहीं सब ऊपर वाले की माया है। जो जन्म देता है रिजक भी वही देगा । उदाहरण भी दिये गये । नेता भी चर्चा में हाजिरी लगवा गये । जितना जहर घोल सकते थे घोल गये । बढ़ती आबादी पर भी राजनीतिक रोटियां सेक गये । दो सम्प्रदायों में अधिक बच्चे पैदा करने की होड़ शुरू करने का आह्वान कर गये । सब अपने धर्म की संख्या बढ़ाने की वकालत करते रहे सच्चे भारतीय पैदा करने की किसी ने बात नहीं चलाई । मां भारती देशभक्तों की राह देख रही है । एक स्कूल में अधिकारी ने एक बच्चे से अचानक पूछ लिया 'कितने बहिन भाई हो' तो बच्चा बोला 'चौदह ।'अफसर की सुनकर सिट्टी पिट्टी गुम होने लगी, बोला 'आज के समय में चौदह बच्चे ?अरे तुम्हारे बाप ने कुछ नहीं सोचा, उस सरकारी नारे ,, की भी दशा और दिशा बदल दी जिसमें कहा गया है 'बच्चे दो ही अच्छे ।' लड़का बोला 'मेरा बाप बहुत समझदार है जानता है चौदह में से दो तो अच्छे निकल ही सकते हैं।'दूसरे स्कूल में भी यही सवाल दोहराया गया तो वहां भी एक लड़के ने कहा 'चौदह ।' अधिकारी हैरानी प्रकट करते हुए बोला 'तुम्हारा बाप क्या काम करता है' तो लड़का बोला 'जिसने चौदह बच्चे पैदा किये हों वह कोई और क्या काम करता होगा बस यही काम करता है।'

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