रोना विछुड़े यारों को,लेके बहाना धुएं का भाभी जी साड़ी में उलझ कर गिरते गिरते कई बार सम्भलीं तो भाई साहब उन्हें सरकार कहने लगे । सरकारें भी बैठे बिठाये फाचर ले लेती हैं और अपने ही जाल में उलझ जाती हैं । महाराष्ट्र में भूचाल आया पड़ा है । मुख्यमंत्री क्या नींद में सो रहे थे । उनके खिलाफ खिचड़ी पकती रही उन तक खुशबू भी नहीं पहुंची । उनके गुप्तचर ,विजिलेंस कहां भटक रहे थे । उन्हीं की पार्टी का एक मंत्री दस बीस नहीं सरकार की चूल हिला देने जितने अड़तीस पार्टी के और बारह निर्दलीय विधायक मुम्बई से सूरत और वहां से गोवाहाटी ले गया । आरोप यह भी है कि मुख्यमंत्री विधायकों के फोन भी नहीं उठाते थे ,अब कुत्ती कादे में फंसी पड़ी है । ऐसा ही राजस्थान में हुआ था लेकिन ऐतिहासिक बाड़ाबंदी से डेमेज कंट्रोल किया । यहां बाहर वाले को सत्ता देने को ज्यादातर विधायक राजी न थे । सरकार जैसी उलझी थी वैसी पड़ी नहीं, गिरते गिरते सम्भल गयी । केंद्र सरकार ने बिना होमवर्क किये जल्दबाजी में नोटबन्दी की ,न काला धन वापिस आया न नकली नोटों पर अंकुश लगा । अफवाह तो उड़ी थी कि सब के खाते में पंद्रह लाख आ जाएंगे, बल्कि नये नोटों के साथ कई फ्राड उद्योगपति अरबों लेकर फुर्र हो गये । वैसे नोटबन्दी के नाम पर अढाई तीन सौ निर्दोष बैंकों के आगे काल के गाल में समा गये । विपक्ष को तब भी मुद्दा मिल गया था । जिन राहुल जी से दो हजार करोड़ रुपयों के हेर फेर के लिये ई डी की पूछताछ चल रही है वे चार हजार रुपल्ली निकलवाने का वीडियो बनवाने चार करोड़ की गाड़ी पर चालीस बॉडी गार्डों के साथ एक बैंक के आगे पहुंचे । जबकि दस लाख भी जिसका जमा था वो भी बैंक नहीं गया ,बैंक वाले सब सुविधा दे रहे थे । बाद में कई बैंक वालों पर भी जांच बैठी ,सुना है बहती गंगा में उन्होंने भी चोखे हाथ धोए थे। काले को सफेद करने में जोर तो आयेगा ही । कश्मीर में धारा 370 तोड़ी ,खूब शाबाशी मिली लेकिन कश्मीरी पंडित आज भी बेघर हैं । घुसपैठिये अब भी आ रहे हैं और बेगुनाहों का खून बह रहा है । तीन तलाक से वे मुस्लिम महिलाएं खुश हुई होंगी जो शोषण की शिकार थीं पुरुष तो तब भी नाखुश थे, अब भी हैं । किसान आंदोलन में सात सौ से ज्यादा किसान मरवाने के बाद काले कानून वापिस लिये अगर शुरू में कह देते कि आपके फायदे के कानून हैं, नहीं लेना चाहते तो वापिस लिए देता हूँ । ऐसा होता तो पंजाब विधान सभा चुनावों में भाजपा का हश्र इतना बुरा न होता । अब अग्निवीर नाम से नौजवानों को चार साल के लिये सेना में भर्ती करने की योजना ले आये । कुछ मायनों में यह सही भी है सत्रह से चौबीस साल की उम्र नाजुक होती है इसी उम्र में लड़के कैरियर बनाते हैं या नशाखोरी आदि में फंसकर बिगड़ते हैं । भर्ती हो जाने के बाद चार साल में दसवीं से सीधे बारहवीं का प्रमाणपत्र और लगभग पचास लाख रुपया घर आ चुका होगा । ज्यादातर युवा तीस पैंतीस साल की उम्र तक इंटरव्यू देते भटकते हैं । ये चौबीसवें साल रिटायर भी हो जाएंगे लेकिन अनेक नौकरियां इनका राह देख रही होंगी । युवा इसके नफे नुकसान को समझ भी नहीं पाये थे विरोधी दलों ने बेरोजगारों को फूंक भरनी शुरू कर दी । तोड़ फोड़ ,आगजनी पत्थरबाजी से देश का ही नुकसान हुआ । एक वीडियो में एक लँगड़ा लड़का बस में तोड़फोड़ करता दिखता है उसे किसी भी हालत में सेना में भर्ती नहीं किया जा सकता । उसका विरोध प्रायोजित था जो किसी भी तरह सही नहीं कहा जायेगा । उसी समय इ डी वाले राहुल को पूछताछ के लिये चक्कर कटवा रहे थे । उधर अग्निपथ का हंगामा शुरू हो गया, कांग्रेस पूछताछ से तंग थी । गांधी परिवार के दरबार में हाजरी के लिये हर कांग्रेसी चापलूसी की हद तक उतावला रहता है । राजस्थान की समूची सरकार ही दिल्ली में डेरा लगाए रही । पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सीधे ही पार्टी की महिला, छात्र विंग व सेवादल को विरोध के लिये उकसाते रहे । अग्निवीर योजना का विरोध तो बहाना था असल कारण ई डी की कार्यवाही का विरोध था । बयानवीर नेता एक भी पानी की बौछारों के आगे डट के खड़ा नहीं दिखा । भीड़ के रूप में गये कार्यकर्ता को भी विरोध से कोई मतलब नहीं था, बस बड़े आकाओं की नजरों में रहना ध्येय था ताकि भविष्य में लड्डू फूटे तो भोरा हमें भी मिले । राजस्थान में सरकार का डेढ़ साल पड़ा है अभी भी बुल्ले छाँगे जा सकते हैं । ऐसे ऐसों को राजनीतिक नियुक्तियों में लाभ मिल चुका है जिन्हें अपने शहर में भी लोग अच्छी तरह से नहीं पहचानते । अगर नेता जनता के काम करने की बजाए बड़े नेताओं को खुश करने की लल्लोचप्पी में लगे रहेंगे तो आम आदमी के रूप में कह सकते हैं कि सरकार गिरती है तो गिरे भाभी जी का पल्लू सलामत रहे ।


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