Saturday, September 17, 2022

मैं तुम्हें टेंडर दूंगा तुम मुझे शुकराना देना चुनावों के तुरंत बाद हर प्रांत के जीते हुए विधायक इलाके के दौरे पर निकलते हैं बाद में पांच साल तक इतनी व्यस्तता हो जाती है कि याद ही नहीं रहता किस गांव में क्या मीठी गोली दी थी । इस कमाऊ यात्रा को कोई भी नाम दिया जा सकता है । आमतौर पर इस आयोजन को धन्यवाद यात्रा कहा जाता है । मकसद इलाके में अच्छी छवि बनाना और लोगों को बताना कि देख लो वायदे के अनुसार आपको सम्भालने आया हूं । विरोधी कहते थे कि अगर मैं जीता तो दोबारा मुंह दिखाने नहीं आऊंगा । लो मैं आ गया । अगर वह सत्ता धारी दल का है तो जनता खूब स्वागत करती है, विपक्षी दल वाले का भी करती है जानती है कल को सरकार में उठापटक हो जाये, इसकी पूछ हो जाये , अंधे के पांव तले बटेर आ जाये और यह मंत्री बन जाये तो काम आ सकता है । इस धन्यवाद यात्रा में नोटों की मालाएं ,सोने की अंगूठियां बेहिसाब महंगी चद्दरें इकट्ठी हो जाती हैं । सामूहिक भोज रखे जाते हैं। अगर आने वाला मंत्री बन चुका है तो अंगूठी का वजन बढ़ जाता है तब मुकुट भी पहनाए जाते हैं । पंजाब वाले सदा ही इस पग फेरी को नया नाम देते रहे हैं उसे वे संगत दर्शन कहते हैं । लोग भी मुंह दिखाई खूब देते रहे हैं । इस प्रकार मिले धन को ए सी बी ने शायद ही पकड़ा हो ।कई सेर सोना इकठ्ठा हो जाता होगा । इस बार पंजाब से नया शब्द आया है - शुकराना । इस शब्द में भी कहीं न कहीं धन्यवाद छुपा है । यानी मैंने आपका काम किया आप मुझे खाली धन्यवाद नहीं दें शुकराना दें । नकद नारायण ही साफ साफ मतलब होता है । पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपनी नयी नवेली सरकार के मंत्री को भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त किया यही नहीं उसे गिरफ्तार करके पुलिस रिमांड पर भी दे दिया । खुद प्रेस वार्ता करके इसकी सूचना दी । दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने भगवंत मान के इस साहसिक कदम की प्रशंसा की । रिश्वत और ईमानदारी की लड़ाई में इतनी त्वरित कार्यवाही किसी अन्य प्रदेश में कभी देखी सुनी नहीं । भीतर ही दबा ली जाती है।वैसे प्रेस वार्ता करके यह बताना कि हमने फलां फलां की सिक्योरिटी हटा ली या कम करदी ,उल्टी पड़ जाती है और सिधु मूसेवाला की जान ले लेती है । बोरे भरकर रिश्वत की राशि जिनके घर से बरामद हुई वे भी किसी पार्टी के आदरणीय रहे उनके पक्ष में भी बयान वीर सामने आते देर नहीं लगाते । रक्षा सौदों में करोड़ों के घोटाले करने के आरोपी ,दिल्ली सिख कत्लेआम के दोषी भी पार्टी टिकट पाते रहे हैं । दुष्कर्म ही नहीं हत्या के आरोपों के बावजूद भी मंत्री, उनके पुत्र या निकट रिश्तेदार के विरुद्ध जांच चलती रहती है वे पद पर आसीन रहते हैं । बाद में मोटी पेंशन भी डकारते हैं । मामला घिसटता रहता है । केस पार्टी हित में दबा लिया जाता है । हो सकता है मुख्यमंत्री की कार्यवाही की मंशा हो लेकिन दबाब समूह के आगे झुकना पड़ता हो । कानून बना लिये हैं ऐसी कार्यवाही से पहले सरकार की मंजूरी लेना अनिवार्य है ,मंजूरी दी नहीं जाती । आरोपी आराम से कार्यकाल पूरा कर जाता है । अफसरों को इस मामले में काफी राहत रही है वे सस्पेंड होने या जेल जाने के स्थान पर तरक्कियां पा जाते हैं और कमाऊ पदों पर मलाई काटते हैं ।जातिवाद दीवार बन कर कार्यवाही के सामने खड़ा हो जाता है । अन्य स्वजातीय विधायक आसान सा फार्मूला फंसे विधायक के आगे रखते होंगे 'तू फंसा हम तेरे साथ हैं, हम फंसे तो हमारे साथ रहना ।' इसमें विपक्षी जातीय भाईचारा भी परोक्ष में साथ दे सकता है । ज्यादा से ज्यादा पद से इस्तीफा दिलवा कर इति करवा ली जाती है कि बेचारे ने त्यागपत्र दे दिया और क्या बच्चे की जान लोगे ? चुनाव आते आते जनता सब कुछ भूल चुकी होती है । राजस्थान में शिक्षक दिवस पर पता नहीं क्या सोचकर मुख्यमंत्री ने शिक्षा मंत्री के सामने ही सम्मानित शिक्षकों से पूछ लिया कि क्या आपको स्थानांतरण के लिये पैसे देने पड़ते हैं? शिक्षक होती है निडर जाति वे सभी हाथ ऊपर करके बोले हां देने पड़ते हैं ।मुख्यमंत्री ने उससे आगे न तो बात की न शिक्षा मंत्री से जबाब तलबी की । जांच कमेटी नियुक्त करनी चाहिये थी पर बात पर मिट्टी डाल दी गयी।वैसे तो गांव कोटवाळी सिखा देता है परंतु कोई आम आदमी पहली बार सत्ताधारी पार्टी के तीसमार खां को हरा कर विधायक बन गया हो और पहले हल्ले केबीनेट मंत्री और वह भी स्वास्थ्य मंत्री बन जाये तो कहना पड़ता है खुदा जब हुस्न देता है नजाकत आ ही जाती है । सत्ता की परंपरा का निर्वाह तो करना पड़ता है । स्वास्थ्य विभाग मलाईदार महकमा माना जाता है । डॉक्टरों को बड़े शहर के बड़े अस्पताल से उठाकर दूर गाँव की डिस्पेंसरी में भेजने की धमकी ही वारे न्यारे कर सकती है । अन्यानेक कमाई के सोर्स इस विभाग में निकाले जा सकते हैं । भर्ती और पोस्टिंग ही काफी अर्थ रखती है । संख्यात्मक रूप से शिक्षा विभाग के बाद बड़ा विभाग है । इस महकमे का मंत्री बनने के बाद शायद ही कोई विधायक असंतुष्ट रहा होगा । पंजाब में आप पार्टी की सरकार बने जुम्मा जुम्मा दो महीने हुए थे कि घटनाक्रम के अनुसार स्वास्थ्य मंत्री डॉ विजय सिंगला ने 'चढ़ते ई ढाण घाळ दी'।अर्थात सरेआम अधिकारी से कमीशन मांगना शुरू कर दिया । सभी अधिकारी भ्रष्ट नहीं होते, कोई जागती जमीर वाला भी होता है । उसने खुद मंत्री, उसके ओ एस डी और रिश्तेदारों द्वारा पैसे मांगने की काल रिकार्डिंग मुख्यमंत्री के सामने जा रखी जिसमें करोड़ों रुपयों के टेंडर में से शुकराना रूप में एक प्रतिशत रिश्वत मांगी बताई जाती है । मुख्यमंत्री ने मंत्री को बुला कर वह रिकार्डिंग सुनाई और पूछा यह आवाज आपकी है ? हां या ना में उत्तर दें । मंत्री के स्वीकार करते ही आगे की कार्यवाही सम्पन्न करवा दी । काम से पहले मांगी घूस रिश्वत और काम के बाद वही राशि शिष्टाचार का चोला पहन कर शुकराना हो जाती है । मुख्यमंत्री ने मिसाल पेश की है । प्रशंसा की जानी चाहिये । विरोधियों की दलीलें रेत की दीवार हैं । खोखली हैं । जो मंत्री खुद रिश्वत मांगने का 'मंगतीया छाप' काम करे वह इस पद के बिल्कुल लायक नहीं । पूर्व मुख्यमंत्री चन्नी खुद को दलित और हर तरह के काम करने वाला बताते रहे, साली का लड़का दस महीनों में ही दस करोड़ को थूक लगा चुका था ,अब उसे कानूनी कार्यवाही का सामना करना पड़ रहा है,पर चन्नी तो सेफ है । इस मंत्री ने स्टाफ में से किसी विश्वसनीय व्यक्ति के माध्यम से यह आदि जुगादि काम करवाना था । मंत्री बनने के बाद तो रिश्तेदार भी नजदीक लगने शुरू हो जाते हैं यह सूगला काम उनसे करवाना था । और क्या रिश्तेदारों का अचार डालना होता है ?आजकल खुद ही फोन पर रिश्वत कोई अदना मुलाजम भी नहीं मांगता । भगवन्त मान के इस फैसले से दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्री और जनता भी सीख लें । केवल इस्तीफा ही नहीं जेल भी भिजवायें और उसके द्वारा करवाये कामों की गहन जांच करवाएं । बनाई गई सम्पत्ति कुर्क करके भरपाई की जाये । जनता तुरन्त कार्यवाही नहीं कर सकती चुनावों में हिसाब बराबर करती है ।

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