Saturday, September 17, 2022

गैंगस्टर तो यूं ही बदनाम हैं हमारे सार्वजनिक पड़ोसी गिरधारीलाल जी डिप्रेशन के मरीज सा बड़बड़ाते हुए हमारे गरीब खाने में तशरीफ़ लाये और आते ही शुरू हो गये, बोले 'अब तो कश्मीरी पंडितों की तरह पलायन करना पड़ेगा लेकिन जायें तो किस जम्मू में जायें? यहां रहना अब दूबर हो रहा है ।' मैंने जब पूछा कि 'क्या हुआ, क्यों फिक्रमंद हो रहे हो ' तो बोले 'यह पूछो क्या नहीं हुआ ? अरे राजस्थान की पावन पवित्र धरा का हर आम आदमी सीधा-सादा , सरल और मेहनती है जो किसी तरह दो जून की रोटी का मुश्किल से जुगाड़ करता है । यहां भी गैंगस्टर पैदा हो गये जो सीधे मंत्री से ही 75 लाख रुपये फिरौती मांग रहे हैं अन्यथा उनके परिवार को मारने की धमकी दे रहे हैं ।आम बन्दे का क्या होगा?' 'आप चिंता क्यों करते हैं।' मैंने कहा 'हमारे विधायक के रूप में चुन कर भेजे दो सौ बब्बर शेर अब खूब खा पीकर,मोटे ताजे होकर, ऐश आराम करके बाहर आये हैं वे सब सम्भाल लेंगे । जरा राज्य सभा चुनावों की जीत हार का विश्लेषण कर लेने दो ।'अब गिरधारी लाल जी ने बात का रुख मोड़ लिया, ढीले पड़ते हुए बोले ,'बाड़ाबंदी के भी क्या ठाठ होते हैं । सुना है एक विधायक एक दिन में चार हजार का तो भोजन खा जाता था जबकि उनमें से कितने बुढऊ शुगर,बी. पी. और अन्य बीमारियों के मरीज होंगे। बाकि ऐशो आराम का एक विधायक पर बीस हजार रुपये प्रतिदिन खर्च आ जाता था । जो मांगो हाजिर होता था । हम तुम तो फाइव स्टार होटल की केवल फोटो देख लिया करो भीतर जाने के लिये किसी बाहरी श्रोत से आया पैसा जेब में होना चाहिये अन्यथा कोई दीवार के भी हाथ न लगाने देगा । मेहनत मजदूरी करने वाला वहां के सुइट, मसाज पार्लर ,पलंग,तौलिये ,बाथ रूम ,तरणताल और खाने की वैरायटियां सपने में भी नहीं देख सकता । भाग्य से मिलता है ऐसा अवसर । जब पैसे की चिंता न हो और नौ दिन फाइव स्टार होटल में जवाई जैसी सेवा,और हर तरह का मनोरंजन मिलता हो , जेब किसी की, हाथ किसी का, वाह क्या किस्मत पाई है । जिन विधायकों के पुरखे उड़ते हवाई जहाज को देख कर उसे चील गाड़ी बताया करते थे उन्होंने विमान को बिना भाड़े की चिंता के ऑटो रिक्शा की तरह इस्तेमाल किया । आते समय बड़े हवाई जहाज में जयपुर आये वहां भी महंगा होटल मिला । भाग्य हो तो विधायकों जैसा । भाजपा ने भी टूट के डर से अपने विधायकों को जयपुर के होटल में ठहराया बस नाम बाड़ाबंदी की जगह ट्रेनिग कैम्प रखा, जनता इतनी बेवकूफ भी नहीं जो शब्दों की हेर फेर न समझे ।'मैंने भी बात आगे बढ़ाई 'शुरू में लगता था हॉर्स ट्रेडिंग हो जायेगी । भीतर घात टी वी चैनल मालिक सुभाष चंद्रा की डगमगाती नैया पार लगा देगी । जब उदयपुर से आते समय फाइनल रिहर्सल करते हुए मॉक पोलिंग करवा कर देखी तो कांग्रेस के चार विधायक गलत वोट कर गये थे, तब लगा भाजपा को फायदा मिलने वाला है । इनके कुछ विधायक कड्डी ढोळेंगे । कुछ निर्दलीय कोप भवन में जा बैठेंगे, पूर्व में उन्हें कोरी झांसे बाजी का झुनझुना ही दिया गया था, कोई मलाईदार ओहदा नहीं मिला ,लगा वे जादूगर को अब पिदकायेंगे, लेकिन उन्होंने आंख की किरकिरी बने कुछ अधिकारियों के हाथों हाथ ट्रांसफर करवाने को ही मोर्चा मार लेना मान लिया और झोला उठा कर बाड़ा बंदी में चले आये । सब विरोध फुस्स हो गये । भीतर ही भीतर क्या पता क्या खिचड़ी पकी और राजस्थान से बाहर से आये तीनों उम्मीदवार सिट्टा सेक गये । वे इतने ही तीसमार खां हैं तो लोक सभा के लिये खड़े होने की रिस्क भी कभी उठाते। वे राजस्थान का राज्य सभा में कितना हित साधन करेंगे, पहले के अनुभव तो अच्छे नहीं । लेकिन पांच साल के लिये चिंतामुक्त हो गये । राज्यसभा कभी भंग नहीं होती । भाजपा की विधायक चंद्रकांता के गिरफ्तारी वारंट ऐन मौके पर निकलवाये ताकि वोट न दे पाये । यह मोहल्ला स्तरीय खुंदक थी, बड़े माननीयों के स्तर का आचरण तो बिल्कुल न था जबकि मामला पांच साल पुराना था । वोटिंग में एक कांग्रेसी विधायक परस राम मोरदिया अपना वोट कैंसिल करवा गये और भाजपा को जो अनुशासित पार्टी होने का मुगालता था वह भी टूट गया । धौलपुर से विधायक शोभा रानी क्रॉस वोटिंग करते हुए अपना मत कांग्रेस के प्रमोद तिवाड़ी को दे गयी।''यह सब तो जनता ने देखा है। हाईकमान ने कह रखा था येनकेन प्रकारेण अपने ये आदमी राज्यसभा में पहुचने चाहिये।संख्या बल के आंकड़ों का गणित साफ था कि तीन कांग्रेस के एक भाजपा का जीतेगा पांचवें की फाचर तो यूं ही फंसाई थी ,इसी पांचवें के कारण बाड़ा बंदी का खेला हुआ और करोड़ों रुपयों को तंगली लगी ।' गिरधारीलाल जी ने मेरी बात बीच में काटते हुए कहा 'आप पढ़े लिखे हैं यह बताओ होटल और विमानों का लगभग तीन करोड़ रुपये का खर्च कौन उठायेगा ?और मन्त्री को मिली धमकी का क्या होगा ? वह रिजर्व सीट पर विधायक जीता है और कम महत्व के महकमे का वजीर है, बस अर्जुन राम मेघवाल के कद को छांगने के लिये उसे महत्व दिया है । वह कहां से इतनी रकम देगा ?''मंत्री का क्या छोटा और क्या बड़ा होता है गिरधारी लाल जी!' मैंने ज्ञान बघारा 'मंत्री चाहे तो स्विमिंग पूल से भी मोती बटोर सकता है, वैसे भी उसका बेटा पंचायत समिति का प्रधान,बेटी जिला परिषद सदस्य है, वो तो देर से मंत्री बने हैं अन्यथा बेटी सीधे जिला प्रमुख बनती । पहले भी एक मंत्री की बेटी जिला प्रमुख रही है । ट्रांसफर करवाने के लिये आने वालों से वही बात करती थी । खर्च की बात तो हम जैसों के लिये ही बड़ी होती है कि चार मेहमान चार दिन रह जायें तो बजट डगमगा जाता है । पहले भी यही विधायक महीना भर फाइव स्टारी मजे लूट चुके हैं, जबकि तब करोना का मंझ था आम आदमी सड़क पर नहीं निकल सकता था ये होटल दर होटल घूम रहे थे । इन्हें जिसने चकरी चढ़ाया था अब वही कह रहा है बाड़ा बंदी की परंपरा अच्छी नहीं । तब खर्च किसने भरा था बात फूटी क्या ? जिसने पहले भरा वही अब भर देगा । मार्बल की खानों से समझ लो सोना निकलता है उनके ठेकेदार छोटी मोटी सेवा को धर्म मानते हैं । हम पर टेक्स जरा और बढ़ जाएंगे । बेरोजगार युवा चार हजार की नौकरी को भी मोहताज हैं और ये एक दिन में चार हजार रुपये भोजन में चट कर जाते थे वो भी खुद के नहीं । आप धमका कर रंगदारी वसूलने वालों को ही गैंगस्टर कहेंगे इनके लिये भी कोई नाम सुझाइये ।विधानसभा में जनहित के मुद्दे यथा बेरोजगारी,बड़ी भर्तियों के समय ही पेपर आऊट क्यों होते हैं,महिलाओं पर ज्यादती सर्वाधिक यहां ही क्यों, सी एच ए का शहीद चौक जयपुर में धरना कितने दिन से चल रहा है उन्हें कोई आश्वाशन क्यों नहीं,राज्य में सब प्रांतों से डीजल पेट्रोल महंगा क्यों, अधिकारी कर्मचारी रिश्वत लेते आये दिन पकड़े जाते हैं इन पर नकेल आदि अनेक मसलों का समाधान निकालने की बजाय होटलों में घूमने वाली पलटन क्या हमारी उम्मीदों की कातिल नहीं । जब ये अगले साल वोट मांगने आयेंगे तब इनसे कहना कि बाड़ाबंदी का मजा ही लेते रहे हुजूर कोई काम भी कराया है आपने ?' गिरधारी लाल जी अपना सा मुंह लेकर चलते बने ।

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